तेरा वैभव अमर
रहे माँ !
हम दिन चार रहें न रहें।
हम दिन चार रहें न रहें।
खे लेने दो नाव
आज
कल कर पतवार गहे न गहे।
जीवन सरिता में शायद फिर
ऐसी धार बहे न बहे।।
अंतिम साँस निकलने तक
है ‘बिस्मिल ‘ की अभिलाष यही।
तेरा वैभव अमर रहे माँ !
हम दिन चार रहें न रहें।
कल कर पतवार गहे न गहे।
जीवन सरिता में शायद फिर
ऐसी धार बहे न बहे।।
अंतिम साँस निकलने तक
है ‘बिस्मिल ‘ की अभिलाष यही।
तेरा वैभव अमर रहे माँ !
हम दिन चार रहें न रहें।
July 18, 2018
Tags :
रम प्रसाद बिस्मिल
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