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Wednesday, July 18, 2018

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वह शक्ति हमें दो दयानिधे, कर्तव्य मार्ग पर डट जावें |


वह शक्ति हमें दो दयानिधे, कर्तव्य मार्ग पर डट जावें |
पर सेवा पर उपकार में हम, निज जीवन सफल बना जावें ||
हम दीन दुखी निबलों विकलों , के सेवक बन सन्ताप हरें |
जो हों भूले भटके बिछुड़े उनको तारें ख़ुद तर जावें ||
छल-द्वेष-दम्भ-पाखण्ड- झूठ, अन्याय से निशदिन दूर रहें |
जीवन हो शुद्ध सरल अपना शुचि प्रेम सुधारस बरसावें ||
निज आन मान मर्यादा का प्रभु ध्यान रहे अभिमान रहे |
जिस देश जाति में जन्म लिया ,बलिदान उसी पर हो जावें ||

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तेरा वैभव अमर रहे माँ !


तेरा वैभव अमर रहे माँ !
हम दिन चार रहें न रहें।

खे लेने दो नाव आज
कल कर पतवार गहे न गहे।
जीवन सरिता में शायद फिर
ऐसी धार बहे न बहे।।
अंतिम साँस निकलने तक 
है बिस्मिल की अभिलाष यही।
तेरा वैभव अमर रहे माँ !
हम दिन चार रहें न रहें।

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